Famous bollywood dialogs and hindi quotes

जिन्दंगी को समझना बहुत मुशकिल हैं. कोई सपनों की खातिर “अपनों” से दूर रहता हैं….. और , कोई “अपनों” के खातिर सपनों से दूर.

पहले लोगों ने सिखाया था, कि वक्त बदल जाता है… अब वक्त ने सिखा दिया कि, लोग भी बदल जाते हैं…

‘मीठा झूठ’ बोलने से अच्छा है ‘कड़वा सच’ बोला जाए.. इससे आपको ‘सच्चे दुश्मन’ जरूर मिलेंगे लेकिन ‘झूठे दोस्त’ नहीं!

नहीं मांगता ऐ खुदा की जिंदगी सौ साल की दे! दे भले चंद लम्हों की, लेकिन कमाल की दें….

शराफत की दुनिआ का किस्सा ही खत्म, अब जैसी दुनिया वैसे हम

बात “संस्कार” और “आदर” की होती है, दोस्तो.. वरना, जो इंसान सुन सकता है, वो सुना भी सकता है” !!

जब सोच में मोच आती है, तब हर रिश्ते में खरोच आती है…

तेरी याद क्यों आती है ये मालूम नहीं, लेकिन जब भी आती है अच्छा लगता है

किसी की तलाश में मत निकलो, ज़नाब लोग खोते नहीं बदल जाते हैं !!

इश्क़ है तो शक कैसा अगर नहीं है तो फिर हक कैसा..?

हकीकत कुछ और भी होती है, गुमसुम बैठा हर इंसान पागल नहीं होता

सहारे ढूढ़ने की आदत नहीं हमारी, हम अकेले पूरी महफ़िल के बराबर हैं।

सिक्का #दोनों_का #होता है, #Heads का भी #Tale का #भी, पर #वक्त सिर्फ #उसका_होता है जो #पलट कर #उपर_आता है

जिंदगी में अगर बुरा वक्त नहीं आता तो अपनों में छुपे हुए गैर और गैरों में छुपे हुए अपनों का कभी पता न चलती…..

झुका ली उन्होंने नज़रे जब मेरा नाम आया ‪ इश्क़ मेरा नाकाम ही सही पर कही तो काम आया

समझदारो की इस दुनिया में हम पागल लोग ही अच्छे है, हम अपने ख्वाब तोड़ देते है पर किसी का दिल नहीं तोड़ते..!!

जीत और हार आपकी सोच पर ही निर्भर करती है… मानलो तो हार गये , और ठान लो तो जीत गये …

जहाँ कदर न हो अपनी वहाँ जाना फ़िज़ूल है, चाहे किसी का घर हो चाहे किसी का दिल।

सारी दुनिया कहती है हार मान लो लेकिन दिल धीरे से कहता है एक बार और कोशिश कर तू जरूर कर सकता है!!

बात कड़वी है पर सच है। लोग कहते है तुम संघर्ष* करो हम तुम्हारे साथ है। यदि लोग सच में साथ होते तो संघर्ष* की जरुरत ही नहीं पड़ती।

जमाना क्या लूटेगा हमारी खुशियां, हम तो खुद अपनी खुशिया दुसरो पर लूटकर जीते हैं

अपनी शख्शियत की क्या मिसाल दूँ यारों, ना जाने कितने मशहूर हो गये, मुझे बदनाम करते करते।

कितना अजिब हैं…..दुनिया का दस्तूर, लोग इतनी जल्दी बात नहीं मानते, जितनी जल्दी बुरा मान जाते है !!

सोचता हु हर कागज पे तेरी तारीफ करु, फिर खयाल आया कहीँ पढ़ने वाला भी तेरा दीवाना ना हो जाए।

मिल जाए आसानी से उसकी खवाइश किसे है, जिद्द तो उसकी है जो मुकद्दर में ही नहीं है

हम चाह कर भी तुम से ज्यादा देर तक नाराज नही रह सकते, क्योंकि तुम्हारी प्यारी सी मुस्कान में मेरी जान बसती है।

अक्सर वही लोग उठाते हैं हम पर उँगलियाँ, जिनकी हमे छुने की औकात नहीं होती।

यूँ सामने आकर ना बैठो, सब्र तो सब्र है, हर बार नही होता ....

दिल में मोहब्बत का होना ज़रूरी है, वरना याद तो रोज दुश्मन भी किया करते हैं।

दुशमन सामने आने से भी डरते थे, और वो पगली दिल से खेल कर चली गई!!

तेरी बातों में जिक्र मेरा….मेरी बातों में जिक्र तेरा….अजब सा ये इश्क हैं….ना तु मेरी ना मैं तेरा

बहुत ही खूबसूरत शब्द लिखे थे, दुनिया में छोड़ने जैसा कुछ है तो, दुसरों को नीचे दिखाना छोड़ दो.

तुझे क्या पता कि मेरे दिल में, कितना प्यार है तेरे लिए, जो कर दूँ बयान तो, तुझे नींद से नफरत हो जाए!

मुझे आदत नहीं यूँ हर किसी पे मर मिटने की…! पर तुझे देख कर दिल ने सोचने तक की मोहलत ना दी ।।

इश्क में इसलिए भी धोखा खानें लगें हैं लोग, दिल की जगह जिस्म को चाहनें लगे हैं लोग..

दुनिया में अगर सबसे अच्छा सोचना है, तो सर्वप्रथम किसी का बुरा सोचना बंद करना होगा..

अजीब सी दुनिया है अजीब से ठिकाने हैं, यहां लोग मिलते कम है झांकते ज्यादा है…

अच्छा करते हैं वो लोग जो मोहब्बत का इज़हार नहीं करते, ख़ामोशी से मर जाते हैं मगर किसी को बदनाम नहीं करते…

एक उमर बीत चली है तुझे चाहते हुए, तू आज भी बेखबर है कल की तरह।

आँसूं हमारी आँखों में कैद थे, बस तेरी याद आई और इन्हें जमानत मिल गयी !!

वो तो शायरों ने लफ्जो से सजा रखा है, वरना मोहब्बत इतनी भी हसीँ नही होती।

तुम्हारी आँख के आँसू हमारी आँख से निकले, तुम्हे फिर भी शिकायत है मोहब्बत हम नहीं करते

भाई बुलाने का हक्क मैंने सिर्फ मेरे दोस्तों को दिया है, वरना दुश्मन हमे आज भी बाप के नाम से जानते है …

मैं भी हुआ करता था वकील इश्क वालों का कभी…. नज़रें उस से क्या मिलीं आज खुद कटघरे में हूँ…

थोड़ी खुद्दारी भी लाजिमी थी दोस्तो, उसने हाथ छुड़ाया तो हमने छोड़ दिया।

सबको उसी तराजू में तोलिए जिसमें खुद को तोलते हो, फिर देखना लोग उतने भी बुरे नहीं हैं जितना हम समझते हैं।

कुछ तो शराफत सीख ले, ऐ इश्क़ शराब से………..!! बोतल पे लिखा तो होता है, मैं जानलेवा हूँ………….!!

पंडित हूँ लाडले, एहसान और अपमान कदै ना भूलता…

इज़हार कर देना वरना,एक ख़ामोशी उम्रभर का इंतजार बन जाती है

दिल में दर्द है आँखों में बेकरारी है, हमें लगी इश्क की अजीब बिमारी है,

अभी तो हम मैदान में उतरे भी नहीं, और लोगों ने हमारे चर्चे शुरू कर दिये!!

जाने कब उतरेगा क़र्ज़ उसकी मोहब्बत का . . हर रोज आँसुओं से इश्क की किस्त भरते हैँ

रूठ गया वो खुदा भी हमसे । जब हमने अपनी हर दुआ में आपको मागा।

आज भी कितना नादान है दिल समझता ही नहीं, बाद बरसों के उन्हें देखा तो दुआएँ माँग बैठा।

ये आईने ना दे सकेंगे तुझे तेरे हुस्न की खबर, कभी मेरी आँखों से आकर पूछो के कितनी हसीन हों तुम…!!

सीने में जूनून और आँखों में देशभक्ति की चमक रखता हूँ ! दुश्मन की सांसे थम जायें, आवाज में इतनी धमक रखता हूँ !!

मैं ये नहीं कहती की तुम्हारे लिए कोई भी दुआ ना मांगे , मैं तो बस यही चाहती हूँ की कोई दुआ में तुम्हे ना मांग ले !

मुस्कुरा जाता हूँ अक्सर गुस्से में भी तेरा नाम सुन कर, तेरे नाम से इतनी मोहब्बत है तो सोच तुझसे कितनी होगी

दिल में तूफां आँखों में दरिया लिए बैठें हैं, ना पूछो हमसे कहानी हमारी, हम अपनी पूरी जिंदगी वतन के नाम किये बैठें हैं !!

काँटों पर चलकर फूल खिलते हैं, विश्वास पर चलकर भगवान मिलते हैं.

मेरे प्यार की हद न पूछो तुम, हम जीना छोड़ सकते है, पर तुम्हे प्यार करना नहीं

Attitude तो बच्चे दिखाते है, #हम तो लोगो को उनकी #औकात दिखाते है..!!

फना होने की इज़ाजत ली नहीं जाती, ये वतन की मोहब्बत है जनाब पूछ के की नहीं जाती..!!

ज़िन्दगी में लक भी सिर्फ उसका साथ देता है ... जिस में जीतने का जज़्बा हो

- लक

हम कितने दिन जिए यह ज़रूरी नहीं ... हम उन दिनों में कितना जीए यह ज़रूरी है

- सनम रे

नज़रे करम मुझ पर इतना न कर, की तेरी मोहब्बत के लिए बागी हो जाऊं, मुझे इतना न पिला इश्क़-ए-जाम की, मैं इश्क़ के जहर का आदि हो जाऊं।

तेरे हुस्न पर तारीफ भरी किताब लिख देता……. काश के तेरी वफ़ा तेरे हुस्न के बराबर होती…….

सरीफ है हम किसी से लड़ते नहीं….. पर ज़माना जानता है किसी के बाप से डरते नहीं

अगर मैं जानता हूँ कि प्यार क्या है, तो इसकी वज़ह सिर्फ तुम हो।

तुम ज़रा हाथ मेरा थाम के देखो तो सही, लोग जल जायेंगे महफ़िल में , चिरागों की तरह

मिलावट है तेरे हुस्न में “इत्र”और “शराब” की,….. तभी मैं थोड़ा महका हूं;…..थोड़ा सा बहका हूं…

ज़िन्दगी से हम अपनी .. कुछ उद्धार नहीं लेते , कफ़न भी लेते है .. तो अपनी ज़िन्दगी देकर

सावन की बूंदों में झलकती है उनकी तस्वीर, आज फिर भीग बैठे हैं उन्हें पाने की चाहत में।

बादशाह की गली में आके उसका पता नहीं पूछते ग़ुलामो के झुके हुए सर खुद बा खुद रास्ता बता देते है

तमाम शहर से मैं जंग जीत सकता हूं, मगर मैं तुमसे बिछड़ते ही हार जाऊंगा .